Wednesday, 26 March 2014
छूटता बंधन-9
हमारी राजनीति का एक और नियम हैं की जिस जिने या सीढ़ी से चढ़ कर आए हो उसे गिरा दो अन्य्था प्रतिद्वंद्धी भी चढ़ेगा। सीढ़ी के रूप में अगर राजनीतिक गुरु भी हैं तो "गीता " याद कर वत्स , उनकी क़ुर्बानी देश के लिए निहायत जरूरी हैं। अगर उम्र -दराज उस्ताद हैं तो और उम्दा तरीके से लीला कीजिए , उनके सठियाने का स्वाँग रचाइये।
तीसरा नियम पनपने वाला हैं। मज़ाक हैं जो कोई पनप जाए। उचित समय पर पर कतरने कि कला कोई हमारे राजनीतिज्ञों से सीखे। गुजरात , हरियाणा ,पंजाब से ओड़िशा तक कितनी नुमाइशें हमने देखी हैं इस कला की। पुराने घाघ राजनीतिज्ञ एक और कला में माहिर थे , उनका विरोधी खेमे में चेला घुसाना। यह प्रेम दो-तरफ़ा होता था , आखिर सियासत अटकलों और संभावनाओ का खेल हैं। मज़ेदार ये हैं कि जिस काल में इस हुनर की सबसे ज्यादा जरूरत थी यानी गठबंधन युग में ये कला विलुप्त होती जा रही हैं। इल्म दा और राजनीतिक विषेशज्ञ इसे ध्रुवीकरण कहते पर हम ख़ाक़सार इसे बदज़बानी मानते हैं।
मेरा छोटा मग़ज़ ये बताता हैं की अगर कुछ अप्रत्याशित न हुआ तो स्थिति विराजमान रहेंगी अपने निहित स्थान पर कुछ वर्षों के लिए। न ,न इसे राजनीतिक भविष्यवाणी न समझिये , मेरी औक़ात सिर्फ राजनीतिक हुनर चालु रखने में हैँ , या वंशवाद चालू रखने में हैं। "psephologist" प्रकरण देख मुझ पर तरस खाइए। भला ऎसी सीरत और सीटो कि बंदरबाट , घड़ी -घड़ी बदलता गणित और दल -बदलते समीकरण , कोई कितने जीते , मेरी बला से।
एक निहायत मुफ्त मशवरा दे रहा हुँ , सीट की संख्या predict न कीजिएगा , गर गणित और psephology का शौक न माने तो इल्तज़ा की जेहन में रखिएगा इल्म-इ-अदद।अनयथा कुछ भक्त आपको पड़ोसी देश भेज देंगे या आपको धार्मिक उन्मादी या उत्पाती घोषित कर देंगे। ये भी हो सके हैं हमारे बच्चों को भ्रष्टाचारी का तमगा भी दे दे कुछ।
"हरि अनंत , हरि कथा अनंत। "
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